Friday, 4 March 2016

                                                             सबर का फल

 



बात उस समय की है जब गौतम बुध  भ्रमद करते हुए किसी गाओं से गुजर रहे थे.उन्हें काफी तेज़ प्यास लगी. उन्होंने अपने एक शिस्य से पानी लेन को खा . शिस्य तालाब के किनरे गया वहां उसने देखा की काफी लोग तालाब के किनारे नहा रहे थे कुछ कपडे धो रहे थे. शिस्या को लगा गुरु जी के लिए इस गंदे पानी को ले जाना टिक नहीं रहेगा आर वह बिना पानी लिए लौट आया. फिर  बुध ने दूसरे शिस्य को भेजा.कुछ देर बाद वह शिस्य लौट और पानी ले आया . बुध ने उससे पूछा की तुम साफ पानी कैसे ले आए  जबकि तालाब का पानी तो गन्दा था. तो उस शिस्य ने उत्तर दिए की पानी तो गन्दा था पर जब सबलोग वहां से चले गए तब मैंने  कुछ देर बाद पानी लिया जिससे गंदगी निचे बैठ गई आर साफ पानी ऊपर आ गया.

गौतम बुध ने इसका सिद्धांत बताया की हमारा जीवन में कई बार दुःख आते है जिससे हमारा जीवन रुपी पानी गन्दा लगने लगता है कुछ लोग उसे देखकर घबरा जाते हैं आर आगे नहीं बढ़ पते औरदूसरी और जो लोग धैर्य से काम लेते हैं वो हर problem का solution निकल लेते है. और कुछ ही टाइम बाद उनके समस्या और दुःख खुद ही खत्म हो जाते हैं.

Thursday, 3 March 2016

                                                    जो होता है अच्छा होता है 

स्नेहा अपने एग्जाम की preparation  कर रही थी. तभी वह सोचने लगी ऐसा क्यों नही होता हम जो सोचे वो पूरा हो जाए. ऐसा सोचकर स्नेहा फिर पढ़ने में लग गई . कुछ टाइम बाद वो फिर सोचती है की काश मेरी favorite  आइस-क्रीम मझे मिल जाए.वह देखती क्या है उसकी मम्मी उसकी favorite आइस क्रीम लेकर आ रही हैं . कुछ देर बाद वो सोचती है काश आज बारिश हो जाए आर उसे tuition  न जाना पढ़े, तभी बारिश होने लगती है अब तो स्नेहा को डाउट होता है जो वह सोच रही है वह कैसे हो रहा है. टेस्ट करने के लिए वह सोचती है की बेस्ट फ्रेंड  घर  आ जाए. तभी उसकी मम्मी बताती है की उसकी फ्रेंड ड्राइंग रूम में उसका वेट कर रही है. अब तो स्नेहा समझ जाती है की वह जो भी सोच रही है सब पूरा होता जा रहा है . यह बात स्नेहा अपनी फ्रेंड को बताती है दोनों बहुत खुश होती हैं .
अब स्नेहा सोचती है की बारिश बंद हो जाए आर दोनों घूमने जाए पार्क में तभी बारिश बंद हो जाती है दोनों पार्क पहुंच जाती है. अब तो उनकी ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं रहता.तभी स्नेहा सोचती है की ये पेड़ कितना पुराना हो गया है अगर ये नहीं होता तो हम आराम से दूर तक देख लेते तभी पेड़ टूटकर गिर जाता है आर सनेहा व उसकी फ्रेंड का पैर पेड़ के निचे आ जाता है और दोनों दर्द से चिल्लाने लगती हैं भगवन हमें नहीं चाहिए ऐसी पावर और सनेहा की नीद खुल जाती है.

Moral of the story

हर कोई शार्ट कट के सहारे सक्सेस पाना चाहता है चाहे वो स्टूडेंट हो , या बिजनेसमैन . सब सोचते है जब मैं जैसा सोचु वैसा हो जाए . पर हर चीज़ सही समय पर सही मेहनत से होती है. जो भी सिचुएशन  आ रही है वो हमें स्ट्रांग बनाने के लिए है.