Thursday, 3 March 2016

                                                    जो होता है अच्छा होता है 

स्नेहा अपने एग्जाम की preparation  कर रही थी. तभी वह सोचने लगी ऐसा क्यों नही होता हम जो सोचे वो पूरा हो जाए. ऐसा सोचकर स्नेहा फिर पढ़ने में लग गई . कुछ टाइम बाद वो फिर सोचती है की काश मेरी favorite  आइस-क्रीम मझे मिल जाए.वह देखती क्या है उसकी मम्मी उसकी favorite आइस क्रीम लेकर आ रही हैं . कुछ देर बाद वो सोचती है काश आज बारिश हो जाए आर उसे tuition  न जाना पढ़े, तभी बारिश होने लगती है अब तो स्नेहा को डाउट होता है जो वह सोच रही है वह कैसे हो रहा है. टेस्ट करने के लिए वह सोचती है की बेस्ट फ्रेंड  घर  आ जाए. तभी उसकी मम्मी बताती है की उसकी फ्रेंड ड्राइंग रूम में उसका वेट कर रही है. अब तो स्नेहा समझ जाती है की वह जो भी सोच रही है सब पूरा होता जा रहा है . यह बात स्नेहा अपनी फ्रेंड को बताती है दोनों बहुत खुश होती हैं .
अब स्नेहा सोचती है की बारिश बंद हो जाए आर दोनों घूमने जाए पार्क में तभी बारिश बंद हो जाती है दोनों पार्क पहुंच जाती है. अब तो उनकी ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं रहता.तभी स्नेहा सोचती है की ये पेड़ कितना पुराना हो गया है अगर ये नहीं होता तो हम आराम से दूर तक देख लेते तभी पेड़ टूटकर गिर जाता है आर सनेहा व उसकी फ्रेंड का पैर पेड़ के निचे आ जाता है और दोनों दर्द से चिल्लाने लगती हैं भगवन हमें नहीं चाहिए ऐसी पावर और सनेहा की नीद खुल जाती है.

Moral of the story

हर कोई शार्ट कट के सहारे सक्सेस पाना चाहता है चाहे वो स्टूडेंट हो , या बिजनेसमैन . सब सोचते है जब मैं जैसा सोचु वैसा हो जाए . पर हर चीज़ सही समय पर सही मेहनत से होती है. जो भी सिचुएशन  आ रही है वो हमें स्ट्रांग बनाने के लिए है.

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